रचना भी एक साधना

bat-bebat रचना चाहे कोई भी हो, आसान नहीं होती। किसी नयी रचना के लिए कुछ पुराना तोड़ना पड़ता है। जब कुछ ध्वस्त होता है तो रचना की जमीन बनती है। इसे दूसरी तरह से भी कह सकते हैं कि जब रचना होती है तो कुछ ध्वस्त होता है। अंकुर बाहर निकले, इसके लिए बीज को नष्ट होना होता... [पूरी पोस्ट]
writer डा.सुभाष राय
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[18 Jun 2010 04:04 AM]

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