महारानी के महा बलिदान दिवस पर विशेष

बुरा भला झाँसी की रानीसिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने... [पूरी पोस्ट]
writer शिवम् मिश्रा
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[18 Jun 2010 02:56 AM]

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