खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी ------ सुभद्राकुमारी चौहान

नारी का कविता ब्लॉग सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थीबूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थीगुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थीदूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थीचमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थीबुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थीखूब लड़ी... [पूरी पोस्ट]
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[18 Jun 2010 02:14 AM]

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