हकार.... बाबा नागार्जुन के गांव से -
साहित्य की प्रगतिशील धारा के प्रतीक पुरुष बाबा नागार्जुन आज नहीं हैं लेकिन उनकी महान विरासत हमारे साथ है। बिहार के मिथिलांचल का एक गांव तरौनी इसलिए धन्य है कि वहीं नागार्जुन जैसे दुर्धर्ष कवि का जन्म हुआ था। उसकी रचनाओं में वहाँ की मिट्टी, पानी और हवा के...
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अरविन्द श्रीवास्तव
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[18 Jun 2010 01:08 AM]



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