मुसलसल ग़ज़ल
वह कहते हैं हुकूमत चल रही हैमैं कहता हूँ हिमाक़त चल रही है उजाले जी हुज़ूरी कर रहे हैंअंधेरों की सियासत चल रही है सब अपने आप चलता जा रहा हैकहाँ कोई क़यादत चल रही है अगर इन्साफ है तो किसकी ख़ातिरअदालत पर अदालत चल रही है वह कल दुश्मन के होंगे साथ लेकिनअभी...
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ravish kumar
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[17 Jun 2010 23:40 PM]



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