रांझा रांझा : बुल्ले शाह के अद्वैत से गुलजार के द्वैत तक
पहुँचे हुये संतो, सिद्धों और सूफियों ने हमेशा अपने और प्रभु के बीच अद्वैत की कल्पना की है या बात की है या दुनिया को बताया है कि आत्मा परमात्मा के साथ एकाकार हो गयी है।
वे लगातार स्तुति से, लगातार ध्यान से एक दशा ऐसी आ जाने का बखान करते रहे हैं जब दूसरा...
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cinemanthan
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[17 Jun 2010 18:05 PM]



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