दिव्य रौशनी के सौदागरो - विनय कुमार
प्रिज्ममेरे भीतर एक प्रिज्म है जब भी कोई रोशनी मुझसे होकर गुज़रती है फट जाती है और सात रंग की चिंदियाँ झिलमिला उठती हैं यह प्रिज्म मेरी जान है मेरे होने की पहली शर्त मेरे बचपन का पहला खिलौना पहली किताब इसकी ढलान पर चढ़ने की कोशिश में जवान हुआ गिरा-पड़ा घायल...
[पूरी पोस्ट]
12
2
0
2
0
[17 Jun 2010 13:27 PM]



Shuffle








