ख्वाब
हर शुरुवात एक मौन खूबसूरती कापर्याय हुआ करती हैएक दुधमुंहे शिशु के जीवन के रुप मे हो या फिरतरोताजगी से भरी अधखिली गर्वितनई नवेली कली के प्रस्फुटन की या फिररात के अंधेरे मे धने काले मेधों केपर्दे से झांकती मदमाती मुस्कुराती सुबह कीकाल के इस जादुई सम्मोहन...
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वंदना शुक्ला
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[17 Jun 2010 11:47 AM]



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