जी रहा हूँ मैं?

उलझन.. जी रहा हूँ मैं,जीने के लिए या मरने के लिए?ये ‘मैं’ जी रहा हूँ या कोई ‘और’?स्वयं को कितना पीछे छोड़ आया हूँ आज मैं?इस हद तक कि,आज मैं लगभग ‘मैं’ रह ही नहीं गया.मेरे जीवन की सारी गतिविधियांउस ‘शून्यता’ को दूर करने के लिए होती हैंजो मेरे अस्तित्व का अंग बन... [पूरी पोस्ट]
writer असीम
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[17 Jun 2010 11:17 AM]

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