मुक्तक 39

Tamatar यदि हम सच्चे मन से देखें तो बहू और बेटी में कोईअंतर नहीं है.जो बेटी है वह दूसरे घर की बहू है और जो बहू है वह अपनी माँ की बेटी भी है. यदि हम इससत्य को जान लें तो बहू-बेटी के बीच का अंतर ही मिटजाएगा.जो बहू-बेटी में अंतर नहीं करते हैं और बहू को बेटी समझते... [पूरी पोस्ट]
writer डा.मीना अग्रवाल

बेटी

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[17 Jun 2010 10:43 AM]

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