'उठो..उठो..ए-भारतवासी..!!!'
..."आँगन में अलसायी..खनखनाती कनक..भेदती समय-चक्र..हौसले की खनक..ह्रदय-ताल में गहराई..इंसानियत की जनक..कब तक जलाएगी..यह राजनीति की भनक..संगठित संपदा करती कमाल..यहाँ-वहाँ फैली चनक..उठो..उठो..ए-भारतवासी..सुनो..भारत माँ की पुकार..मिटा मन के विषण..खोलो राह एक...
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Priyankaabhilaashi
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[17 Jun 2010 08:04 AM]



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