बुद्धि मुझे दो शारदा
बुद्धि मुझे दो शारदा, सदन शीघ्र बन जाय ।कर पूरण स्वर-साधना, देऊ तुझे बिठाय ।।देऊ तुझे बिठाय, विराजो मेरे घर में ।ऐसे गीत लिखाय , हो अंतस में प्रकाश ।।कह `वाणी` कविराज, चित्त में शुध्दी मुझे दो |रचूं कुंडली शतक , मात सदबुद्धि मुझे दो || शब्दार्थ :...
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हिंदी
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[17 Jun 2010 06:54 AM]



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