बुद्धि मुझे दो शारदा

काव्य कलश बुद्धि मुझे दो शारदा, सदन शीघ्र बन जाय ।कर पूरण स्वर-साधना, देऊ तुझे बिठाय ।।देऊ तुझे बिठाय, विराजो मेरे घर में ।ऐसे गीत लिखाय , हो अंतस में प्रकाश ।।कह `वाणी` कविराज, चित्त में शुध्दी मुझे दो |रचूं कुंडली शतक , मात सदबुद्धि मुझे दो || शब्दार्थ :... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

हिंदी

views
11
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[17 Jun 2010 06:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix