जी हां पुनीत! पूंजीवाद सड़ती हुई लाश है, ऐसे

मजदूरनामा ‘मेरी आवाज ही पर्दा है मेरे चेहरे का मैं खामोश जहां, मुझको वहां से सुनिए'पुनीत ने जो कहा है, वहां मैं बाद में आऊंगा। शुरू मैं वहां से करता हूं जहां पुनीत चुप हैं। उन्होंने शुरू ही इस वाक्य से किया है, ‘बाकी सब तो ठीक है...’मैं पूछना चाहता हूं पुनीत, क्या... [पूरी पोस्ट]
writer maalanch
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[17 Jun 2010 07:03 AM]

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