आसान नहीं होता, होना.. लेखक..
तुम्हारे लिए तो पैरिस ‘अ मूवेबल फीस्ट’ नहीं होगा, फिर फटेहाल क्यों घूमते होगे, ढूंढ़ते क्या लंदन में, लेखक? सैंतालीस साल के संक्षिप्त जीवन में जीवन से कैसा जी लगाया होगा, भाषा को सर के बल खड़ा करके बस इतनी ज़रा उम्र, अपनों की ही नहीं, स्पेन के सपनों की...
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Pramod Singh
किताबी दुनिया
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[17 Jun 2010 06:32 AM]



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