कविता :बंदरिया नाच दिखाती

BAL SAJAG बंदरिया नाच दिखातीएक बंदरिया नाच दिखावे ।बन्दर खड़े-खड़े पछतावे ॥ मदारी रोज पैसा कमावे । बंदरिया बन्दर को चिढावे ॥एक दिन बन्दर गुस्सा हो बैठा । बंदरिया बोले ले खाले भांटा ॥ बन्दर चिढ़कर गुस्से में बोला । चुप हो जा वरना जाग जायेगा मेरा शोला ॥ फिर भागेगी... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[17 Jun 2010 05:17 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix