चाँद की बारिश
कल फिर रात देर तलक मद्धिम बरसात होती रही ,मानो तन्हा उदास चाँद टिप टिप पिघल रहा हो.. !धीमे धीमे टपक रहे हो चाँद के आंसू फलक से ,रिमझिम रिमझिम बरसती रही चाँदनी टूट-टूट कर..! फिजा में घुल गयी चांदनी रिमझिम सी बरखा मद्धिम सी , मेरे घर के आँगन में उतर आई है...
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आकांक्षा गर्ग
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[17 Jun 2010 02:48 AM]



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