आ गइल अवतारी पुरुस
छोट रहनी हँS तS कई बेर केहू-केहू कहि देत रहल हS की ए बाबू अवतारी हउअS का? एकदिन रहाइल ना अउरी हम पूरा गाँव-गिराँव, हित-नात सबके बोलवनि अउरी कहनी की रउआँ सभे जानल चाहत बानी न की हम अवतारी हईं की का हईं. तS रउआँ सभे धेयान लगा के सुनि ली सभें की हम अवतारिए...
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प्रभाकर पाण्डेय
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[17 Jun 2010 02:50 AM]



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