निर्वात

मेरी कविताएँ [Meri Kavitayen] हर साल की तरह इस बार भी गरमी अपने पूरे शबाब पर है.फ़िर वही चिर परिचित धूल भरी गरम हवाएं.समाचारों में देख रहे हैं कि भारत में तो बारिशें खूब हो रही हैं .कुछ महीने पहले यहाँ भी हुई थी बारिश एक पूरा दिन !दो तीन दिन  लगातार होती तो कम से कम ये सड़कें... [पूरी पोस्ट]
writer अल्पना वर्मा
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[17 Jun 2010 00:57 AM]

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