सूर्योदय जीवनोदय

स्वार्थ खामोश, रुठे रुठे अंदाज में चलती ज़िन्दगी उदास दिल, जाने किन तूफानों के आने की आशंकाओं से ग्रस्त ऐसे ही चल रहा था ऐसे ही चलता रहता अगर उस सुबह अचानक सूरज की इठलाती किरणों ने एक वृत बनाकर मुझे घेर न लिया होता और छेड़ कर मुस्कुराकर पूछा न होता ” हाल... [पूरी पोस्ट]
writer स्वार्थ

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[17 Jun 2010 00:07 AM]

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