प्यार ही तो है .........
चन्दा को चांदनी से सूरज को रोशनी सेबादल को बूंदों से प्यार ही तो है पेड़ों को साए से धरती को आस्मां सेईश्वर को भक्तों से प्यार ही तो है सागर अपने तट से बादल अपने पथ से वायु अपने वेग...
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ana
kavita
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[16 Jun 2010 23:44 PM]



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