याद-पुरानी यादों की गठरी से

गीतकार की कलम फूलों की पांखुर से फ़िसक रही शबनम सीसाज की मुंडेरों पर थिरक रही सरगम सीसन्ध्या के आँचल में टाँक रही गुलमोहरनिशिगन्धी महकों में लिपट खड़े मधुवन सीयाद कोई सपना बन, आंखों में तैर गईउस पल पर जीवन की एक सांस ठहर गईगंगा की धारा में मांझी के गीतों सीदादी से सुनी... [पूरी पोस्ट]
writer Geetkaar
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[16 Jun 2010 21:55 PM]

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