इल्म के ज़रिए इबादत ख़ुदा होती है।

Aman Ka Paighaam हज़रत रसूले ख़ुदा (स.) के पास एक शख़्स अन्सार में से आया और उसने सवाल किया, ऐ रसूले ख़ुदा अगर किसी का जनाज़ा तदफ़ीन के लिए तैयार हो और दूसरी तरफ़ इल्मी नशिस्त हो जिसमें शिरकत करने से कस्बे फ़ैज़ हो और दोनों एक ही वक़्त हों और वक़्त भी इतना न हो कि दोनों... [पूरी पोस्ट]
writer Voice Of The People
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[31 May 2010 01:57 AM]

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