चाय बिन मांगे , पानी मांगे से हम पिलाने लगे ---एक ग़ज़ल

daralnama कहते हैं -- अतिथि देवो भव: । हमारे देश में अतिथि का आदर सत्कार करना परम कर्तव्य माना जाता है । लेकिन ऐसा लगता है कि बदलते ज़माने के साथ यह सोच भी बदल रही हैं ।बोर्ड रूम में मीटिंग चल रही थी । अस्पताल की गर्म समस्याओं पर गर्मागर्म बहस चल ही थी । बाहर भी... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ टी एस दराल

ग़ज़ल

views
45
upvote
8
downvote
0
rating
8
comments
31
[16 Jun 2010 20:00 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix