कथा-गीत: मैं बूढा बरगद हूँ यारों... ---संजीव 'सलिल'

भारत-ब्रिगेड कथा-गीत: मैं बूढा बरगद हूँ यारों... संजीव 'सलिल' * * मैं बूढा बरगद हूँ यारों... है याद कभी मैं अंकुर था. दो पल्लव लिए लजाता था. ऊँचे वृक्षों को देख-देख- मैं खुद पर ही शर्माता था. धीरे-धीरे मैं बड़ा हुआ. शाखें फैलीं, पंछी आये. कुछ जल्दी छोड़ गए मुझको- कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्य नर्मदा divya narmada
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[16 Jun 2010 14:47 PM]

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