जीवन लंबा ,लम्बे रस्ते.......
पुनः -----जीवन लंबा, लम्बे रस्ते,रस्तों की सारी धूप छांह,अपने-अपने सपनों की राह,अपनी मंजिल की लिए चाह,जीने की आस में, काटें हम,कितने ही पल मरते मरते, जीवन लंबा ,लम्बे रस्ते.......इसका हर घूँट, कभी अमृत सा, कभी कड़वाहट, विष सी पायी है, कभी एक सुरूर सा,...
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योगेश शर्मा
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[16 Jun 2010 09:58 AM]



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