JANHA MAN KO ROOCHTA HAI

JEEWAN SANGEET हम जाते हैं वंहा, जंहा मन को रुचता है .दिल होता अनमोल, नहीं धन से मिलता है . दिलवाले के साथ किसी का दिल मिलता है . दिल से दिल मिल जाते ही बंधन जुड़ता है . कोई रजा रहे, रहे वह अपने घर का कोई ज्ञानी रहे, रहे वह अपने घर काअहंकारी निज अहंकार में घुल मरता है .... [पूरी पोस्ट]
writer JEEVAN SANGEET
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[16 Jun 2010 08:12 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix