JANHA MAN KO ROOCHTA HAI
हम जाते हैं वंहा, जंहा मन को रुचता है .दिल होता अनमोल, नहीं धन से मिलता है . दिलवाले के साथ किसी का दिल मिलता है . दिल से दिल मिल जाते ही बंधन जुड़ता है . कोई रजा रहे, रहे वह अपने घर का कोई ज्ञानी रहे, रहे वह अपने घर काअहंकारी निज अहंकार में घुल मरता है ....
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JEEVAN SANGEET
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[16 Jun 2010 08:12 AM]



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