“बादल तो बादल होते हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक)

uchcharan सूचनाः- 17 जून से 19 जून तक लुधियाना में रहूँगा! 21 जून को ही ब्लॉगिस्तान  में वापिस लौटूँगा! मेरा एक पुराना गीत बादल तो बादल होते हैं ।भरी हुई छागल होते हैं।। तन में जल का सिन्धु समेटे,नभ में कृष्ण दिखाई देते, लेकिन धुआँ-धुआँ होते हैं ।बादल तो... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

गीत

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[16 Jun 2010 07:50 AM]

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