हजपुरा
....मैं लखनऊ ,छोड़ के पूना आ गया ....फिल्म क़ा ज्ञान लेनेरैगिंग के डर से ....दो चार दिन अपने एक पहचान वाले घर ही रहापर बकरा कब तक जान बचाएगा .....एक दिन किरण कुमार औररजा मुराद के हत्थे चढ़ गया .....बड़ी -गाली गलौज से बात की ॥वैसे मैं भी थोड़ा सा बदमाश...
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भंगार
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[16 Jun 2010 06:22 AM]



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