खुद को धोखे देने की बीमारी, तुम्हारी याद और जिम मोरिसन

हथकढ़ दो यातना भरे दिन सुलगते रहे. रात को कड़कती बिजली की चीख पुकार के बावजूद रोने को आतुर आसमान के तले नशे में आराम से सोया रहा. स्मृतियों का जो बचा हुआ समान है, उस पर कमबख्त समय नाम की दीमक भी नाकाम है. कोई हल नहीं होता कोई याद नहीं जाती. सत्रह साल पहले कभी... [पूरी पोस्ट]
writer hathkadh
views
11
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
0
[16 Jun 2010 04:27 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix