वह आये घर में हमारे, ख़ुदा की क़ुदरत है !

मिर्ज़ा ग़ालिब है ग़ैब ग़ैब जिसको समझते हैं हम शुहूद,हैं ख़्वाब में हनोज़, जो जागे हैं ख़्वाब में ।शुहूद वह अवस्था होती है जब साधक को सभी वस्तुओं में ईश्वर ही ईश्वर दिखाई पड़ता है । ग़ैब ग़ैब का मतलब गैबुलग़ैब या परोक्ष का परोक्ष है । कहते हैं, जिसे हम सर्वत्र उपस्थित... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

Mirza Ghalib

views
13
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
4
[16 Jun 2010 02:49 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix