रचना के बीच अंतराल
अन्यमनस्क मन ,कई-कई दिन ,खोजता है एक रचना ,जीवन में .बहुत दिनों तक सुनता है कोयल का गान ,ढूंढता है अतीत का एक प्रणय - प्राण ,बुजूर्गों के सुनाये किस्से ,पाठ के रटे - रटाये हिस्से ,किसी से किया हुआ अनुबंध ,एक भूला हुआ सम्बन्ध .नदी के किनारे...
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अतुल प्रकाश त्रिवेदी/ અતુલ પ્રકાશ ત્રિવેદી
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[16 Jun 2010 02:11 AM]



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