आपकी छ्त्र छाया

रज़िया मिर्ज़ा धक..धक..धक..धक… मौत का काउनडाउन शुरु हो चुका था। मेरे “बाबा”(पिताजी) हम सब को छोडकर दुनिया को अलविदा कहने चले थे। अभी सुबह ही तो मैं आईथी आपको छोडकर “बाबा” । मैं वापस आने ही वाली थी। और जीजाजी का फोन सुनकर आपके पास आ भी गई। आपके सीनेपर मशीनें लगी हुईं... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
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[16 Jun 2010 02:10 AM]

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