कविता :बरसात का महीना

BAL SAJAG बरसात का महीनाबरसात का महीना बड़ा सुहाना ।जब देखो तब बारिश होती ॥ रिमझिम-२ बरसता पानी ।रात को रहता है गरम-गरम ॥ कपड़े पहनते तो और गरम ।दिन में देखो तो बारिश होती ॥जिधर भी देखो घास ही दिखती ।बरसात का महीना बड़ा सुहाना ॥लेखक :सोनू कुमारकक्षा :९अपना घर... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[15 Jun 2010 23:49 PM]

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