समय केले का छिलका है....

हिन्द-युग्म चाँद का पानी पीकर,लोग कर रहे होंगे गरारे...और झूम रही होगी जब सारी दुनिया...मशीन होते शहर में,कुछ रोबोट-से लोगढूँढते होंगे,ज़िंदा होने की गुंजाइश।किसी बंद कमरे में,बिना खाद-पानी केलहलहा रहा होगा दुःख...माँ के प्यार जितनी अथाह दुनिया केबित्ते भर हिस्से... [पूरी पोस्ट]
writer निखिल आनन्द गिरि

suicide

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[15 Jun 2010 22:38 PM]

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