उसके अपने [लघुकथा] - सूरजप्रकश
वैसे वह काफी पढ़ा-लिखा और खुले विचारों वाला युवक था। एक कॉलेज मे साहित्य पढ़ाता था, लेकिन शहर मे आए दिन होने वाले दंगो से उसे बहुत डर लगता था। ये दंगे कभी भी भड़क उठते थे। वजह कोई भी हो, उनका अंत सांप्रादायिक दंगे के रूप में होता था।पूरा शहर दो हिस्सों मे...
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[15 Jun 2010 21:33 PM]



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