कुल्लू से बिजली महादेव

मुसाफिर हूँ यारों 5 जून, 2010, शनिवार। सुबह लगभग दस-ग्यारह बजे कुल्लू पहुंच गया। बस अड्डे से ब्यास के उस तरफ वाला पहाड बहुत ही आकर्षित कर रहा था। उसी पर कहीं बिजली महादेव है। बस अड्डे पर घूम ही रहा था कि ढाबे वालों ने घेर लिया कि साहब, आ जाओ। परांठे खाओ, चाय पीयो। इधर... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज जाट जी

फोटू

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[15 Jun 2010 22:30 PM]

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