कौन थी आशा थी तुम्हारी
कौन थी आशा थी तुम्हारी जो अभी पानी थीयाद कैसी थी हमारी जो नहीं आनी थीहमने क्या दखल दिया ,आप खुद ही आ बैठेबचके जो निकल गए , राह को ही ले बैठेसाथ होने में बुराई भी नहीं मानी थी || याद कैसी ....मन में जब पीर भरी कोई छिपाए कैसेदृग से जो नीर ढले वो न रुलाये...
[पूरी पोस्ट]
क्षत्रिय
8
1
0
1
3
[15 Jun 2010 22:09 PM]



Shuffle








