कौन थी आशा थी तुम्हारी

Shri Tan Singh, Badmer कौन थी आशा थी तुम्हारी जो अभी पानी थीयाद कैसी थी हमारी जो नहीं आनी थीहमने क्या दखल दिया ,आप खुद ही आ बैठेबचके जो निकल गए , राह को ही ले बैठेसाथ होने में बुराई भी नहीं मानी थी || याद कैसी ....मन में जब पीर भरी कोई छिपाए कैसेदृग से जो नीर ढले वो न रुलाये... [पूरी पोस्ट]
writer क्षत्रिय
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[15 Jun 2010 22:09 PM]

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