मरू-संहिता

निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग सहारा रेगिस्तान को पार करते हुए दो यात्रियों ने एक खानाबदोश बेदुइन की झोपड़ी को देखा और उसमें रुकने की इज़ाज़त मांगी. जैसे सभी बंजारा जातियां करतीं हैं, बेदुइन ने बहुत हर्षोल्लास से उनका स्वागत किया और उनकी दावत के लिए एक ऊँट को जिबह करके बेहतरीन भोजन... [पूरी पोस्ट]
writer Nishant

भलाईविविध कथाएँअच्छाई

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[15 Jun 2010 21:30 PM]

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