फ्रॉम नोव्येहेर कोई नहीं
दुनिया की हर शै पर किसी न किसी की छाप है। हर शख्स कहीं न कहीं से। किसी ने पढ़ी किताबें। कोई मां-बाप से सीखा हुआ। किसी के जीन ने उसे ऐसा बना दिया है। किसी को अनुभवों ने घिसघिसाकर कोने ख़त्म कर दिए, कोई भीतर से लहूलुहान है। किसी ने कोई दुःख नहीं देखा तो कोई...
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JAIPRAKASH PARASHAR
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[11 Oct 2009 07:05 AM]



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