सामने ईश्वर टहल रहा था
बहुत दिनों के बाद मेरी माँ ने मेरे लिए बाजरे की रोटी बनाई। मैं बथुआ की भाजी के साथ जब बाजरे की तवे से उतरती गर्म रोटियां खा रहा था तब मुझे दफ्तर जाने की कोई जल्दी नहीं थी। मेरा सात साल का बेटा मेरे पास बैठा था। जैसे मैं कभी अपने पिता के पास बैठा करता...
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JAIPRAKASH PARASHAR
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[08 Jan 2010 05:23 AM]



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