तकरीर तो थी पर रहम न था
(हिंदी में ग़ज़ल एक ऐसी विधा है, जो मुझे हमेशा करीब लगती है। अपनी बात कहने के लिए बड़ी आसान। पहली बार हाथ आजमा रहा हूँ। माफ़ करें।)वो घर अच्छा भी था तो खौफ कोई कम न थाखलीफा की बातें थीं बातों में कोई दम न थादम घुटने की शिकायत मैं उससे क्या करताधुआं उसके...
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JAIPRAKASH PARASHAR
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[12 Feb 2010 02:59 AM]



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