सुनी थी रात उसकी हिचकियाँ ....

काव्य मंजूषा Banff  नॅशनल पार्क ..मोरेन लेक...लहू में कौंध रहीं हैं बिजलियाँसाँसों में चलने लगीं आँधियां यादों का आँचल अब उड़ने लगानज़रों में तैर गई परछाईयाँ थके थके से मेरे ख़्वाब जागते रहे सितारे लेते रहे अंगडाईयाँ जाने कौन गुज़रा दीवार के... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[15 Jun 2010 18:15 PM]

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