चारोक्ति

अमिताभ 1,हां मैं हारा हुआ हूंअब बताओ कैसे जीतोगे मुझसे? मगर सावधान रहना तुमजीत स्थाई नहीं होती। और न हार....।2,गुरुर के लायक होसबकुछ तो है तुम्हारे पास,इसलिये आंखे भी बन्द है,और मैं गुरबत में तुम्हे खुली आंखों से देख रहा हूं।3,सुना हैपुण्य भी कटते हैंचलो आज मैं... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव
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[15 Jun 2010 13:17 PM]

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