kuch kavitayen kuch hain geet
गुलमोहर के रंग फीके हैं यहाँ पर , तुम नहीं हो .धूप के भी तीर तीखे हैं यहाँ पर , तुम नहीं हो .तुम नहीं हो, और ये लम्बी दोपहरीआँख की कोरों पे आके बूँद ठहरी .कब गिरेगी, ना गिरेगी कौन जाने ?कौन उंगली पर सम्हाले ....? तुम नहीं हो . गुलमोहर के रंग फीके हैं...
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सीमा रानी
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[15 Jun 2010 11:44 AM]



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