AAJ TUM HO KAHI
आज तुम हो कंही और मैं हूँ कंही . बात के सब बदल गए है अंदाज अब कोई बीते ख्वाबों में रहता है कब ?रात रोटी रही दिन विहँसता रहाचाँद-तारे वंही, मन खिसकता रहा मन की बातें सभी मन में घुलती रही आज तुम हो कंही, और मैं हूँ कंही . . तब तुम थे औ तेरे सभी नाज़ थेतेरी...
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JEEVAN SANGEET
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[15 Jun 2010 11:40 AM]



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