चरैवेति ! चरैवेति ! चरैवेति !........

एहसास अंतर्मन के #######चलना छोड़ाव्यर्थ ही दौड़ानिकलूं आगेइस होड़ मेंभुला दिया निजरहूँ मैं ना द्विजफँस गया कैसीजोड़-तोड़ मेंदौड दौड करदम भी फूलालक्ष्य है क्यातू यह भी भूलाचलना था जिन्हेंले कर साथगिरा उन्हें ,बढ़ा,छोड़ के हाथस्वार्थ छोड़ करआगे बढ़नातब जानेगादिल को पढनाचलना... [पूरी पोस्ट]
writer roohshine
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[13 May 2010 14:15 PM]

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