मरहम...

एहसास अंतर्मन के #########इच्छा नाहो गरस्वयम के ज़ख्मों कोभरने की॥व्यर्थ हैंकोशिशेंबाहरीसंवेदनाओं केमरहम कीसभी...हो ना मनअनुकूल ,ग्राह्य ,मरहम केप्रतिअगर ,बनादेती हैज़ख़्म कोनासूरविपरीतप्रतिक्रियाभी कभी ........ [पूरी पोस्ट]
writer roohshine

आशु रचना (सर्वाधिकार सुरक्षित)

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[17 May 2010 00:37 AM]

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