संदेसा पवन का...
########ले के आई पवन संदेसा पिया तेरे जब आवन काजेठ की तपती धरती को ज्यूँ हुआ भान हो सावन का ....महक उठा मन तन उपवन साखिले मोगरा और जूही चहक उठी हर डाल पे चिडियाँसंगीत बना मेरा तूहीरोम रोम हर्षित मेरा हैदरस होगा मनभावन का जेठ की तपती धरती को ज्यूँ हुआ भान...
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roohshine
कविता (श्रृंगार रस)
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[19 May 2010 02:11 AM]



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