चौदहवीं का चाँद

एहसास अंतर्मन के #######'कल चौदहवीं की रात थी "दिखा होगा न चाँद तो शहर में तुम्हारे भी..यही गज़ल गुनगुनाते थे तुम भर कर मेरा चेहरा अपनी हथेलियों में 'हम हंस दिएहम चुप रहे मंज़ूर था पर्दा तेरा 'और मैं इठला के पूछ बैठी थी चौदहवीं का ही क्यूँ पूनम का क्यूँ नहीं..और कहा था... [पूरी पोस्ट]
writer roohshine
views
1
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[27 May 2010 02:24 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix