जीवन क्रम ...

एहसास अंतर्मन के मानवता से प्रेम बड़ा हैमन के ऊपर मानवता ,मन के भेद- अभेद खुले जबदिखे छुपी निज दानवता हैं परिभाषाएं गढ़ी हुई जोलगती हैं सारी निस्सार थोथा जीवन जीते  हैं हम जान ना पाते इसका सार चार  तरह के मनुज धरा पर करते जीवन क्रम निर्धारितकैसा जीवन पाए मानव... [पूरी पोस्ट]
writer roohshine
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[08 Jun 2010 00:26 AM]

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